
बिलासपुर-छत्तीसगढ़ की साय सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता ने मंत्रिमंडल विस्तार को असंवैधानिक करार देते हुए इसे चुनौती दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में इस याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में एक शपथपत्र पेश किया गया, जिसमें उन्होंने अपने द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों का ब्यौरा दिया। हालांकि, चीफ जस्टिस ने शपथपत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें न तो किसी कार्यक्रम की तारीख है, और न ही समय। उन्होंने फोटो पर भी टिप्पणी करते हुए पूछा कि यह फोटो कहां से खिंचवाए गए हैं।सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि इस प्रकार का एक मामला पहले से ही 2022 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा, ताकि वह अपना पक्ष और मजबूत कर सके। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को समय देते हुए अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है।इस पूरे मामले को लेकर सियासी गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और साय सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर आगे क्या फैसला आता है।




