
बिलासपुर। सिम्स के प्रसूति विभाग में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते दिनों औसतन रोजाना 25 से अधिक डिलीवरी हो रही हैं। इनमें से 15 से ज्यादा केस सीजर ऑपरेशन के होते हैं, जबकि करीब 35 से 40 प्रतिशत केस जिला अस्पताल से रेफर होकर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि सिम्स में उपलब्ध बेड और संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। विशेष बात यह है कि जिला अस्पताल से आने वाले अधिकांश केस सामान्य डिलीवरी के होते हैं। ऐसे मामलों को रेफर करने पर विभाग ने आपत्ति जताई है।

सिम्स अधीक्षक लखन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि का कहना है कि सामान्य केस को भी रेफर करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे गंभीर और जटिल मरीजों के लिए संसाधनों की कमी हो जाती है। सिम्स प्रशासन ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से लगातार रेफरल केस बढ़ने से डिलीवरी मरीजों की संख्या 12 से 15 अधिक हो गई है। इसके चलते ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और नर्सिंग स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव है। यहां तक कि गंभीर मरीजों की देखरेख में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। सीमित संसाधनों में बढ़ते केस से ऑपरेशन शिफ्ट भी प्रभावित हो रही है।

प्रत्येक 15 से अधिक सिजेरियन केस आने पर ऑपरेशन थिएटर पर भार दोगुना हो जाता है। इससे मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि अगर यही स्थिति रही तो जटिल केस के लिए खतरा बढ़ सकता है। सिम्स प्रशासन ने मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ को दी है। साथ ही सुझाव दिया है कि जिला अस्पताल में डिलीवरी की सुविधाएं मजबूत की जाएं और केवल गंभीर केस ही रेफर किए जाएं। ताकि सिम्स का बोझ कम हो सके और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। इधर, विभाग ने डिलीवरी रेफरल पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। जिला अस्पताल से भेजे जा रहे मामलों की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगे यदि सामान्य केस रेफर किए गए तो संबंधित चिकित्सक से जवाबदेही तय की जाएगी। इससे उम्मीद है कि रेफरल की स्थिति में सुधार आएगा और सिम्स में दबाव कुछ हद तक कम होगा।




