
बिलासपुर-मस्तूरी रोड पर कार सवार युवकों के स्टंट मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि पुलिस गरीब और मध्यम वर्ग पर तो सख्ती दिखाती है, लेकिन धनी और रसूखदार अपराधियों के सामने दंतहीन बाघ बन जाती है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि जब्त 18 कारों को अदालत की अनुमति के बिना न छोड़ा जाए।डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की कि ऐसे स्टंटबाज युवकों पर पुलिस की कार्रवाई केवल दिखावा है, जबकि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व अन्य कठोर कानूनों के तहत केस दर्ज होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कार्यवाही ऐसी होनी चाहिए, जिससे यह युवकों के जीवनभर के लिए सबक बने।महाधिवक्ता प्रफुल्ल भरत ने बताया कि वाहनों को जब्त कर लिया गया है और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई है। बावजूद इसके कोर्ट ने कहा कि अब तक की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है।गौरतलब है कि 17 सितंबर को बिलासपुर-मस्तूरी नेशनल हाईवे पर ग्राम लावर में जन्मदिन मनाने जा रहे युवकों ने चलती कार की खिड़कियों और सनरूफ पर लटककर स्टंट किए थे। उनकी इस हरकत से हाईवे पर जाम और राहगीरों की जान पर खतरा पैदा हो गया था। अब कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर तय की है और मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है।




