जय जय माँ
महावीर माने महाविष्णु विष्णु इंद्र आदि देव महावीर शब्द के दो अर्थ है हनुमान जी व गरूड़
किंन्तु दोनो का अपना महत्त्व है एक जिन्होंने हनुमान जी को वर दिया एक जिन्होंने गरुड़ को वर दिया एक ओर भाव है वीर पुरुषों को वर देने वाली वीर शब्द का एक ओर अर्थ भी है ब्रह्म रसामृतपानशील यह लाक्षणिक अर्थ है इंद्र शब्द का शाब्दिक अर्थ है ब्रह्मवित ब्रह्मरूपी अमृत पान करने वाले ज्ञानि
एक अन्य अर्थ में जागरण, स्वपन,ओर सुषुप्ति इन तीनो अवस्थाओं में तुरीय अनुसंधान मग्न योगीयों को वीरेंद्र कहा गया है एक अन्य विशेषता की देवी योगियों महान जितेंद्रियों को वर देने वाली है
पूर्ण विशेषता यह कि देवी वरदा है वही त्रिमूर्तियों से भी ऊपर है
जय माँ
प्रणाम वन्दन
आचार्य श्री शुभेश महाराज
राष्ट्रीय प्रमुख धर्म समाज
अखिल भारतीय संत समिति







