
बिलासपुर में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध एक बड़े प्रदर्शन में बदल गया। मंगलवार को कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सिविल लाइन थाना पहुंचे और दोनों मामलों में गिरफ्तारी देने की घोषणा की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सिविल लाइन थाना परिसर को पूरी तरह पुलिस छावनी में बदल दिया।

बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। कांग्रेसी नेताओं ने थाने के बाहर ही धरना शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि सरकार व प्रशासन राजनीतिक द्वेष की भावना से कांग्रेस पदाधिकारियों पर झूठे प्रकरण दर्ज कर रहा है। उनका कहना था कि लगातार विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

प्रदर्शन स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी, जिससे माहौल राजनीति से गरमाया रहा। पहला मामला 19 अगस्त का है, जब कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू और उनकी पार्षद पत्नी ने वार्ड की समस्याओं को लेकर नगर निगम कार्यालय का घेराव किया था। उस प्रदर्शन के बाद दोनों पर प्रशासन ने एफआईआर दर्ज की थी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को उठाना उनका अधिकार है, लेकिन सरकार उसे अपराध की तरह पेश कर रही है। दूसरा मामला 27 नवंबर के कांग्रेस हल्लाबोल प्रदर्शन से जुड़ा है। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अपमान का आरोप लगाते हुए भाजयुमो के जिला नेतृत्व ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष समेत अन्य नेताओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस में नाराजगी और बढ़ गई। इन्हीं दोनों मामलों में कांग्रेस नेता मंगलवार को स्वयं गिरफ्तार होने के लिए थाना पहुंचे। उनका कहना था कि यदि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए केस दर्ज करेगी, तो वे गिरफ्तारी देने से पीछे नहीं हटेंगे।

नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। धरने और गिरफ्तारियों के दौरान माहौल शांतिपूर्ण रहा। कुल चार कांग्रेसी नेताओं ने दोनों मामलों में अपनी गिरफ्तारी दी, जिसके बाद पुलिस ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।




