
रेलवे रनिंग स्टाफ की नाराज़गी अब आंदोलन के रूप में सड़क पर दिखाई दे रही है। मंगलवार सुबह से ही लोको पायलट और गार्ड GM कार्यालय, ट्रेनिंग सेंटर और सभी क्रू लॉबियों के बाहर धरने पर बैठ गए।रात भर कड़ाके की ठंड के बावजूद कर्मचारियों ने 48 घंटे का उपवास शुरू कर दिया है। सुबह से दोपहर, शाम होते-होते और रात भर भी कर्मचारी टेंट के सहारे उपवास पर डटे रहे। कई लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट ड्यूटी के दौरान भी बिना भोजन और पानी के ट्रेनें चला रहे हैं।कर्मचारियों का आरोप है कि DA 50% होने के बाद सभी भत्तों में 25% बढ़ोतरी लागू की गई, लेकिन माइलेज भत्ता अब तक नहीं बढ़ाया गया। रेलवे बोर्ड इसे जेन्युइन मांग मान चुका है, फिर भी वित्त विभाग फाइल रोककर बैठा है।

आंदोलनकारियों ने कहा हम देश की अर्थव्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा संभालते हैं, लेकिन हमारे हक़ की अनदेखी की जा रही है।रनिंग स्टाफ ने स्टाफ की भारी कमी को भी बड़ी समस्या बताया है। बिलासपुर ज़ोन में 12,000 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 7,500 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि 4,541 पद खाली पड़े हैं। नई भर्ती चयनित होने के बाद भी जॉइनिंग नहीं दी जा रही। इससे ओवरटाइम बढ़ा है, आराम कम हुआ है और लगातार नाइट ड्यूटी के कारण सुरक्षा प्रभावित हो रही है।AILRSA के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक फैसला नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे। रातभर तापमान गिरने के बावजूद धरना जारी है। कर्मचारियों का कहना है।रेलवे सुरक्षित तभी होगी, जब रनिंग स्टाफ सुरक्षित होगा।फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।




