
पुराने हाईकोर्ट परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक सिस्टम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां परीक्षा फॉर्म, प्रवेश पत्र, अंकसूची, एडमिशन और आवेदन संबंधी कार्य के लिए रोजाना सैकड़ों विद्यार्थी पहुंचते हैं, लेकिन पिछले दो दिनों से दीक्षांत समारोह की तैयारी के नाम पर पूरा कामकाज ठप पड़ा है। स्थिति यह रही कि दूर-दराज से आए छात्र घंटों लाइन में खड़े रहे, लेकिन किसी ने उनकी समस्या तक सुनना जरूरी नहीं समझा।कर्मचारियों से लेकर अधिकारी तक व्यस्तता का हवाला देते रहे, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश सीटें खाली थीं और कई कार्यालयों के दरवाजे बंद मिले। परीक्षा विभाग के प्रमुख और सहायक कुलसचिव रामेश्वर राठौर खुद ऑफिस से गायब थे।

पूछने पर उन्होंने कहा कि वे दीक्षांत समारोह की तैयारी में लगे हैं, लेकिन छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि राठौर अक्सर कार्यालय में अनुपस्थित रहते हैं और उनकी गैरमौजूदगी का फायदा निचले स्तर के कर्मचारी मनमर्जी करने में उठाते हैं।एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया मैं पांच दिनों से चक्कर लगा रहा हूं, सिर्फ एडमिशन अपडेट करवाना है। यहां कर्मचारी बात तक नहीं करते। कहते हैं दीक्षांत चल रहा है, बाद में आओ।’ तो क्या हम अपना भविष्य रोककर दीक्षांत के नाम पर इंतजार करते रहें।कई छात्रों का कहना है कि वे गांवों से किराया खर्च कर यहां आते हैं और लौटने के बाद फिर से वही परेशानी झेलनी पड़ती है।ये हालात उस यूनिवर्सिटी के हैं, जहां सरकार पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया का नारा देती है, लेकिन सिस्टम में बैठे कुछ अधिकारी–कर्मचारी ही छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसा प्रशासनिक अव्यवस्था और लापरवाही आखिर कब तक जारी रहेगी।क्या कोनी स्थित मुख्य परिसर और कुलपति कार्यालय को इस समस्या की कोई जानकारी नहीं, या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है? छात्रों का सवाल साफ है हमारा समय, पैसा और भविष्य बर्बाद हो रहा है… इसका जिम्मेदार कौन।




