
बिलासपुर/बिल्हा, छत्तीसगढ़।
बिल्हा तहसील के थाना हिर्री क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में जालफा गांव के निवासी शोएब खान (पेशा: कोल वाशरी कर्मी) की मौके पर ही मौत हो गई। घटना रात लगभग 2 से 2.30 बजे के बीच की बताई जा रही है, जब वह ड्यूटी समाप्त कर अपने घर लौट रहे थे।
घटना का विवरण
शोएब खान को नेशनल हाईवे पर अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। पुलिस ने रात में ही शव को कब्जे में लेकर बिल्हा कोर्ट के पीछे स्थित मार्चुअरी में रखवा दिया।
चिकित्सा एवं प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही उजागर
परिजन सुबह 10 बजे थाना formalities पूरी करने के बाद बिल्हा सरकारी अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों द्वारा किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया गया।
परिजन दोपहर 2 बजे तक डॉक्टर का इंतज़ार करते रहे, परंतु लगातार टालमटोल की स्थिति बनी रही।

एसडीएम बिल्हा से संपर्क का प्रयास भी विफल रहा—ऑफिस में मौजूद बाबू ने न तो समस्या सुनी, न ही सही नंबर उपलब्ध कराया। तहसीलदार का नंबर भी स्विच ऑफ/नॉट रीचेबल था।
काफी प्रयास के बाद जब परिजन BMO से जुड़े, तो उन्होंने फोन उठाकर बिना संवाद किए ही एक तरफ रख दिया।
काफी देर बाद एक महिला चिकित्सक पहुँचीं, जिन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी उस दिन ड्यूटी नहीं थी, फिर भी वे आई हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक शोएब खान अपने पीछे पत्नी और चार छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। इनमें से दो 8 माह की जुड़वा बेटियाँ भी शामिल हैं।
परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। जिस कोल वाशरी में शोएब कार्यरत थे, वहाँ कर्मचारियों का कोई उचित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, जहाँ शोएब जैसे दर्जनों मजदूर रोज़ काम करते हैं।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है, बल्कि सरकारी तंत्र की उदासीनता, कर्तव्यहीनता और मानवीय संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
परिजनों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी आम नागरिक के साथ कभी भी हो सकती है, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और व्यवस्था सुधार बेहद जरूरी है।




