
जिले में सेकेंड हैंड गाड़ियों की खरीद–बिक्री में नामांतरण नहीं कराने की वजह से लगातार समस्याएँ सामने आ रही हैं। कई वाहन मालिक शिकायत कर रहे हैं कि गाड़ी बेचने के बावजूद चालानी कार्रवाई उनके ही नाम पर दर्ज की जा रही है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यातायात विभाग के अनुसार पुराने वाहन बेचने के बाद यदि नामांतरण समय पर नहीं होता, तो वाहन से जुड़ी हर प्रकार की कानूनी और चालानी जिम्मेदारी पहले मालिक के नाम पर ही जाती है। यही कारण है कि रोजाना ऐसे अनेक मामले सामने आते हैं, जिनमें चालान पुराने वाहन स्वामी के ऊपर लग जाता है, जबकि गाड़ी उनके पास होती ही नहीं। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए यातायात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे ने बताया कि सेकेंड हैंड गाड़ी खरीद–बिक्री करने वाले सभी समझदार वाहनधारकों को पहले ही बुलाकर स्पष्ट रूप से समझाइश दी गई थी। उन्हें बताया गया था कि गाड़ी बेचने या खरीदने के तुरंत बाद नामांतरण प्रक्रिया पूरी करवा लें, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी परेशानी से बचा जा सके। अधिकारी ने कहा कि नाम ट्रांसफर में लापरवाही बरतने से सबसे अधिक नुकसान पहले वाहन मालिक को उठाना पड़ रहा है। यातायात टीमों द्वारा की गई कार्रवाई का दंड और जिम्मेदारी उसी के नाम पर दर्ज होती है, जबकि वास्तविक रूप से वाहन इस्तेमाल करने वाले कई बार ट्रेस भी नहीं हो पाते। इसके बावजूद भी विभाग के पास ऐसे कई मामले पहुँच रहे हैं, जहाँ नामांतरण न होने के चलते पहला पक्ष परेशानियों का सामना कर रहा है। कई लोग चालान कटने के बाद ही यह समझ पाते हैं कि वाहन बेचने के बाद केवल एक कागज़ी एग्रीमेंट करने से कानूनी जिम्मेदारियाँ समाप्त नहीं होतीं यातायात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी मामलों में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी और लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि वाहन खरीद–बिक्री के साथ तुरंत आरटीओ में नामांतरण करवाना आवश्यक है, जिससे न केवल कानूनी झंझटों से बचा जा सकता है बल्कि यातायात व्यवस्था भी सुचारू बनी रहती है।




