
बिलासपुर में स्कूल शिक्षा विभाग की संभागीय बैठक में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षकों की कमी नहीं, बल्कि समर्पण की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अपने स्कूल के प्रति प्रेम और पढ़ाई में रुचि रखने वाले शिक्षक ही शिक्षा गुणवत्ता सुधार की नींव हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने स्कूल निरीक्षण के लिए विकसित ऐप को लांच किया और जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर बीईओ व बीआरसी तक सभी को नियमित स्कूल निरीक्षण अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अच्छे शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाएगा और लापरवाह शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव, डीपीआई और संभाग के सभी आठ जिलों के शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे।मंत्री यादव ने तीन वर्षों की समग्र कार्ययोजना तैयार करने, ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने, स्कूलों की यू-डाइस अपडेट करने और ड्रॉपआउट रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने 10वीं का परिणाम 85% और 12वीं का 90% लक्ष्य रखने के निर्देश देते हुए बेसिक हिंदी, गणित और अंग्रेजी दक्षता सुधार पर विशेष जोर दिया। सेवानिवृत्त शिक्षकों के स्वत्व उसी दिन निपटाने, भवनविहीन स्कूलों की अधोसंरचना जल्द पूर्ण करने और मॉडल स्कूलों को उत्कृष्ट शिक्षण का आदर्श बनाने के निर्देश भी दिए। स्कूल मरम्मत के छोटे कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपने का फैसला लेते हुए उन्होंने कहा कि इससे काम तेजी से होगा और समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी।




