
कोटा ब्लॉक के ग्राम बरर में अरपा नदी के किनारे करीब 10 एकड़ वनभूमि पर अवैध कब्जा कर जंगल को साफ कर खेत में तब्दील कर दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। जिस भूमि पर वर्ष 2012-13 में वन विभाग द्वारा प्लांटेशन कराया गया था, वहां आज जेसीबी और ट्रैक्टर से मिट्टी खुदाई कर खेती की तैयारी की जा चुकी है।स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से पेड़ों की कटाई कर वन क्षेत्र को समाप्त किया गया। इससे न केवल हरियाली नष्ट हुई है, बल्कि अरपा नदी के तटीय क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जल स्रोत और जैव विविधता पर भी सीधा खतरा पैदा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि गतिविधियां खुलेआम होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।सूत्रों के अनुसार वन विभाग की जमीन पर हुए इस अतिक्रमण में कथित मिलीभगत की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। प्लांटेशन के बाद संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरती गई, जिसका फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने वनभूमि को खेती योग्य बना दिया।यह मामला केवल ग्राम बरर तक सीमित नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कोटा ब्लॉक में वनभूमि पर अतिक्रमण की यह प्रवृत्ति तेजी से फैल सकती है और आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।




