
बिलासपुर के सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र स्थित मित्तल फर्नीचर फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने दो मजदूरों की जान ले ली। देर रात आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया। घटना के दूसरे दिन तक मुआवजा नहीं मिलने पर परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।वीओ: सिरगिट्टी इंडस्ट्रियल एरिया में मित्तल फर्नीचर फैक्ट्री में देर रात अचानक आग भड़क उठी। आग इतनी भयावह थी कि फैक्ट्री में रखा फर्नीचर, लकड़ी, फोम और अन्य कच्चा माल पूरी तरह जलकर खाक हो गया। आग की चपेट में एक ऑयल टैंकर, मालवाहक वाहन और एक बाइक भी आ गई, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ।घटना के समय फैक्ट्री में 12 से 15 मजदूर काम कर रहे थे।

परिसर में ज्वलनशील तारपीन तेल से भरे टैंकर और ड्रम रखे हुए थे। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि एक टैंकर से ऑयल लीकेज हो रहा था और पास ही लूज वायरिंग के बीच मजदूर काम कर रहे थे, जिससे आग लगने की आशंका जताई जा रही है। आग लगते ही धमाकों की आवाज़ और धुएं के गुबार से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत कार्यों के दौरान गंभीर अव्यवस्थाएं भी सामने आईं। झुलसे हुए सुपरवाइजर रितेश शुक्ला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी, जिसके चलते स्थानीय लोगों ने ई-रिक्शा से उसे अस्पताल पहुंचाया।

वहीं फैक्ट्री के भीतर काम कर रहा अभिजीत सूर्यवंशी आग में फंस गया और बुरी तरह जल गया, जिसकी अस्थियां फॉरेंसिक टीम ने बरामद कर परिजनों को सौंपीं।आग पर काबू न पाने की स्थिति में बिजली विभाग को सूचना दी गई, लेकिन इसके बावजूद करीब तीन घंटे बाद बिजली लाइन काटी गई। फैक्ट्री का मुख्य गेट छोटा होने के कारण क्रेन की मदद से उसे तोड़ना पड़ा। बड़े पैमाने पर फर्नीचर निर्माण करने वाली इस फैक्ट्री में सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं थे। हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन का मौके पर नहीं पहुंचना भी लोगों के गुस्से का कारण बना।

घटना के समय मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मंत्री शहर में युवा महोत्सव कार्यक्रम में व्यस्त थे, वहीं इतनी बड़ी आगजनी के बावजूद जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। दूसरे दिन तक मुआवजा नहीं मिलने से नाराज मृतकों के परिजनों और क्षेत्रवासियों ने फैक्ट्री के बाहर धरना देकर हंगामा किया। इसके बाद हरकत में आई कंपनी ने मृतक रितेश शुक्ला और अभिजीत सूर्यवंशी के परिजनों को बुधवार दोपहर 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया। फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है, लेकिन यह हादसा औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल छोड़ गया है।




