
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थापना दिवस के अवसर पर मनरेगा के नाम परिवर्तन और उसके मूल ढांचे में किए गए बदलाव के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेशभर में एकजुट प्रदर्शन किया गया। बिलासपुर शहर के तिफरा सहित अलग-अलग ब्लॉकों में यह विरोध प्रदर्शन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। तिफरा ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू के नेतृत्व में तिफरा ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश, जिला, ब्लॉक, मंडल, सेक्टर और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, किसान कांग्रेस, एनएसयूआई, इंटक सहित सभी प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने गरीब, मजदूर और किसान के हक की आवाज बुलंद की।

लक्ष्मीनाथ साहू ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा कानून यूपीए सरकार के दौरान ग्रामीण मजदूरों को सौ दिन का रोजगार देने की गारंटी के साथ लाया गया था, लेकिन अब नाम बदलकर और मूल ढांचे में बदलाव कर इसे कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाओं को धार्मिक नाम देना कोई उपलब्धि नहीं है, बल्कि असली काम जनता की आर्थिक स्थिति सुधारना है।उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधन के बाद केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत भुगतान का बोझ डाला जा रहा है। साथ ही यह तय करने का अधिकार भी केंद्र अपने पास रख रहा है कि योजना किस राज्य में और किस काम के लिए लागू होगी।

यह गरीब राज्यों के साथ अन्याय है और मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश है।इस मौके पर पार्षद पुरुष्पेंद्र साहू ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले पंद्रह वर्षों से केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है। योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलकर जनता को गुमराह किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर रोजगार और विकास के मुद्दे हाशिये पर चले गए हैं। फिलहाल मंडल अध्यक्षों ने भी कहा कि भाजपा की नीति दोगली है। एक ओर विकास के दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर गरीबों की योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि जनविरोधी संशोधन वापस नहीं लिए गए तो पार्टी प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।




