
बिलासपुर जिले के रतनपुर तहसील से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम घासीपुर निवासी किसान योगेंद्र शास्त्री का आरोप है कि जिस जमीन पर उनका परिवार पिछले करीब 50 वर्षों से खेती करता आ रहा है, उसे अचानक अधिकारियों ने “बड़े झाड़ का जंगल” घोषित कर दिया है। इस फैसले से किसान परिवार सदमे में है और न्याय की गुहार लगा रहा है।किसान योगेंद्र शास्त्री के अनुसार खसरा नंबर 6/21 और 6/28 की लगभग दो एकड़ भूमि उनके परिवार के नाम दर्ज है। यह जमीन उनके दादा लखन लाल ने वर्ष 1996 में पंजीकृत बैनामा के माध्यम से खरीदी थी। इतना ही नहीं, वर्ष 1928-29 के मिशल रिकॉर्ड में भी यह भूमि निजी मालगुजारी के रूप में दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि इसी जमीन के एक हिस्से को शासन ने चांपी जलाशय योजना के तहत अधिग्रहित किया था, जिसके बदले किसान को लगभग 15 हजार रुपये का मुआवजा भी दिया गया था।किसान का सवाल है कि यदि जमीन वन भूमि थी, तो मुआवजा क्यों दिया गया और वर्षों तक उससे लगान क्यों वसूला गया। पीड़ित किसान ने सभी दस्तावेजों के साथ तहसील न्यायालय में पक्ष रखा है और कलेक्टर से निष्पक्ष जांच कर वैध मालिकाना हक बहाल करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या फैसला लेता है।




