
जिला अस्पताल में बीते एक महीने से ज्यादा समय से टिटनेस इंजेक्शन की गंभीर कमी सामने आ रही है। हालात यह हैं कि आपातकालीन और सामान्य मरीजों को डॉक्टर पर्चे पर साफ तौर पर लिखकर दे रहे हैं कि टिटनेस वैक्सीन और उसे लगाने के लिए सिरिंज या डिस्पोज़ेबल बाहर से खरीदकर लानी होगी। सरकारी अस्पताल में बुनियादी दवाइयों की अनुपलब्धता ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।समझ से परे यह स्थिति तब है, जब टिटनेस जैसी सामान्य और आवश्यक वैक्सीन की आपूर्ति तक अस्पताल प्रबंधन या जिला प्रशासन सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है। ऐसे में गंभीर और संवेदनशील मामलों पर ध्यान दिए जाने को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। मरीजों के साथ-साथ इलाज के लिए आने वाले पुलिसकर्मियों को भी मजबूरी में अपनी जेब से टिटनेस इंजेक्शन सहित अन्य मेडिकल सामग्री खरीदनी पड़ रही है।मौसम में लगातार बदलाव के कारण मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे मरीजों को इंजेक्शन लगवाने के लिए सिरिंज या डिस्पो तक बाहर से लाने को कहा जा रहा है, जिससे गरीब और दूरदराज से आए मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।इस संबंध में जिला अस्पताल के आरएमओ का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा सीजीएमएससी को लगातार दवाइयों की कमी से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन वहां से समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अब सवाल यह है कि जब एक माह से आवश्यक वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, तो जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही कौन तय करेगा।




