
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर बिलासपुर गुरुद्वारा कमेटी एवं पंजाबी युवा समिति द्वारा पिछले सत्रह वर्षों से लगातार अलौकिक कीर्तन दरबार का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में इस वर्ष भी श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत भव्य आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया और गुरु वाणी का श्रवण किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत अमृतसर से पहुंचे पांच प्यारों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके द्वारा 36 श्रद्धालुओं को अमृतपान कराया गया जिससे गुरुद्वारा परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक भावपूर्ण हो गया।

इसी क्रम में दयालबंद स्थित गुरुद्वारे में रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में साध संगत ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।

रक्तदान को मानव सेवा का सर्वोत्तम कार्य बताते हुए आयोजकों ने सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त किया।

अलौकिक कीर्तन दरबार में गुरु महाराज की वाणी का मधुर कीर्तन प्रस्तुत किया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आई संगत ने पूरे श्रद्धा भाव से कीर्तन में सहभागिता की और गुरुबाणी का आनंद लिया। गुरुद्वारे में दिनभर भक्ति, सेवा और अनुशासन का वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम के दौरान भव्य लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में साध संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।

लंगर सेवा में युवाओं एवं सेवादारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और गुरु की सेवा को अपना सौभाग्य बताया।

इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी द्वारा सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। बिलासपुर के प्रतिष्ठित व्यवसायी मनजीत सिंह गुम्बर जी एवं अंकित गुम्बर जी को समाज सेवा एवं धार्मिक कार्यों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

अलौकिक कीर्तन दरबार के अंतिम दिन विशेष दीवान का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।

गुरुद्वारे में श्रद्धा और भाईचारे से भरा माहौल देखने को मिला, जहां संगत ने एकजुट होकर गुरु महाराज का स्मरण किया।

अंतिम दिन के विशेष दीवान में अमृतसर से भाई करनैल सिंह, भाई सतनाम सिंह,भाई जगजीत सिंह, भाई तरनवीर सिंह एवं भाई अमरजीत सिंह की विशेष उपस्थिति रही।

इनके कीर्तन से गुरुद्वारा परिसर गुरु नाम से गूंज उठा और आयोजन का समापन अत्यंत श्रद्धा एवं गरिमा के साथ संपन्न हुआ।




