योजना का नाम बदलना सिर्फ राजनीतिक दिखावा और राज्य सरकारों पर अतिरिक्त बोझ डालना, कांग्रेस को ग्रामीणों के हित से नहीं बल्कि राजनीति से मतलब

केंद्र में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत ग्रामीणों को उनके ही गांव में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था। अब केंद्र की मोदी सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर जी-राम-जी योजना कर दिया है। नई योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को 100 की जगह अब 125 दिन का रोजगार मिलेगा। योजना में खर्च की हिस्सेदारी को लेकर भी बदलाव किया गया है, जिसमें 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार की भागीदारी तय की गई है।

हालांकि योजना के नाम परिवर्तन और राज्य सरकार की बढ़ी हुई हिस्सेदारी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार राज्यों पर आर्थिक बोझ डाल रही है और पुरानी योजना के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर रही है।कांग्रेस के विरोध पर पलटवार करते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा विकास विरोधी रही है और ग्रामीणों के हित में किए जा रहे कार्यों में अड़ंगा डालने का काम कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जी-राम-जी योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पहले से ज्यादा लाभकारी है और भाजपा का हर कार्यकर्ता इस योजना को जन-जन तक पहुंचाकर इसके फायदे बताएगा।

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