
जिले के लगभग हर स्कूल में शिक्षकों की कमी सामने आ रही है जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खासकर कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नजदीक होने के कारण यह स्थिति छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। कई स्कूलों में अब तक पूरा पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाया है जबकि प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी सिर पर हैं। शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों को न तो समय पर विषयों की पढ़ाई मिल पा रही है और न ही प्रैक्टिकल की पर्याप्त तैयारी हो पा रही है ऐसे में विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है और वे परीक्षा की तैयारी को लेकर असमंजस में हैं।इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है यह बात छिपी नहीं है। हालांकि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि जहां संभव है वहां वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि जिले के कई स्कूलों में अब भी शिक्षकों के पद खाली हैं। ऐसे में इस बार का परीक्षा परिणाम कैसा रहेगा, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्तमान हालात को देखते हुए कई लोग यह कहने से भी नहीं हिचक रहे कि इस बार का रिजल्ट मानो भगवान भरोसे ही नजर आ रहा है।




