
बिलासपुर से इस वक्त जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। तोरवा के व्यस्त चौक पर करीब एक घंटे तक चारों दिशाओं से भीषण जाम लगा रहा, लेकिन सूचना के बावजूद न ट्रैफिक पुलिस पहुंची और न ही स्थानीय थाना पुलिस। हालात ऐसे बने कि आखिरकार एक महिला रेलकर्मी को खुद सड़क पर उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा ये दृश्य तोरवा चौक के हैं, जहां रेलवे रोड, पावर हाउस रोड, छठ घाट रोड और जगमल चौक रोड—चारों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। वाहन रेंगते रहे, लोग जाम में फंसे रहे और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हैरानी की बात यह रही कि बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा।इसी बीच रेलवे सिविल डिफेंस में पदस्थ एक महिला रेलकर्मी ने हालात की गंभीरता को समझा और खुद आगे बढ़कर ट्रैफिक संभालना शुरू किया। बिना किसी संसाधन के, अकेले सड़क पर उतरकर उन्होंने करीब एक घंटे तक यातायात को नियंत्रित किया और जाम को धीरे-धीरे खुलवाया।महिला रेलकर्मी की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता देखकर आम नागरिक भी आगे आए।

लोगों ने निर्देश मानते हुए वाहनों को नियंत्रित करने में सहयोग किया और यातायात व्यवस्था बहाल करने में हाथ बंटाया। यह नज़ारा कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बन गया।लेकिन इसी के साथ ट्रैफिक पुलिस की बड़ी लापरवाही भी उजागर हो गई। एक ओर शहर में सड़क सुरक्षा माह के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जाम जैसी स्थिति में ट्रैफिक अमला नदारद नजर आया।

चौक-चौराहों पर चेकिंग दिखती है, लेकिन वास्तविक जरूरत के वक्त व्यवस्था चरमराती दिखाई देती है।अब सवाल यह है कि क्या शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी आम नागरिकों और महिला कर्मचारियों पर छोड़ दी गई है और अगर जाम की स्थिति में भी जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचेंगे, तो फिर सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के दावे आखिर किस काम के।




