
एसईसीएल प्रबंधन की कोयला खदानों और जर्जर सड़कों से उड़ने वाली काली धूल अब क्षेत्र के लिए धीमा जहर साबित हो रही है खदानों से कोयला लेकर निकलने वाले भारी वाहनों ने न केवल कॉलोनियों और गांवों की आबोहवा बिगाड़ दी है बल्कि आलम यह है कि खुद क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालय भी अब इस धूल के गुबार से अछूता नहीं रह गया है ।हैरानी की बात यह है कि जो अधिकारी इस प्रदूषण को रोकने के लिए जिम्मेदार हैं वे खुद धूल भरे कमरों में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं हवा में उड़ती कोयले की महीन डस्ट अब एसईसीएल के दफ्तरों के भीतर तक प्रवेश कर चुकी है कर्मचारी और ग्रामीण रोजाना इस काली डस्ट को अपने फेफड़ों में उतारने को मजबूर हैं लेकिन प्रबंधन गहरी नींद में सोया हुआ हैप्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे रहने वाले परिवारों का जीना मुहाल हो गया है घरों के भीतर रखी खाने-पीने की चीजों से लेकर बिस्तर तक पर कोयले की परत जम रही है इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अधिकारी एसी कमरों और बंद गाड़ियों में बैठकर जनता की तकलीफों के प्रति आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए हैं ।




