
बिलासपुर पुलिस द्वारा संचालित चेतना आओ संवारें कल अभियान एक बार फिर सुर्खियों में है। इस पहल के तहत आज अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह ने दिशा सेंटर और विभिन्न थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान यूनिसेफ की टीम भी मौजूद रही, जिसने इस मॉडल की सराहना करते हुए इसे बच्चों के लिए एक सकारात्मक पहल बताया। बिलासपुर पुलिस का “चेतना” कार्यक्रम वर्ष 2014 से लगातार संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को सहयोग देना है, जो सामाजिक या आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं या संवेदनशील परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। यह पहल बच्चों को सही दिशा, शिक्षा और संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।इसी क्रम में आज यूनिसेफ की टीम ने दिशा सेंटर और थानों में बनाए गए चाइल्ड फ्रेंडली कक्षों का गहन निरीक्षण किया। टीम ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए बच्चों के लिए बनाए गए सुरक्षित और सहज वातावरण को समझा और कई सुझाव भी दिए, जिससे इस मॉडल को और प्रभावी बनाया जा सके।

एएसपी मधुलिका सिंह ने बताया कि “चेतना कार्यक्रम के तहत यूनिसेफ टीम के साथ संयुक्त निरीक्षण किया गया है। बच्चों के लिए जो चाइल्ड फ्रेंडली सिस्टम विकसित किया गया है, उसे और बेहतर बनाने के लिए हमें नए दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं, जिन पर जल्द ही अमल किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान बच्चों, उनके अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों से सीधे संवाद कर फीडबैक भी लिया गया। वहीं सिंगापुर से आई यूनिसेफ प्रतिनिधि मिलिना ने कहा कि यह दौरा उनके लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बिलासपुर पुलिस के इस प्रयास को एक उत्कृष्ट चाइल्ड फ्रेंडली कम्युनिटी पुलिसिंग मॉडल बताया, जो बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने में मदद कर रहा है।यूनिसेफ प्रतिनिधि मिलिना ने कहा कि यहां बच्चों के लिए जिस तरह की देखभाल और सहयोग दिया जा रहा है, वह सराहनीय है। यह मॉडल अन्य स्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की पहल बच्चों को अपराध और गलत रास्तों से दूर रखते हुए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही है। बिलासपुर पुलिस का चेतना मॉडल अब न केवल राज्य बल्कि देशभर में पहचान बना रहा है और इसे बेस्ट इन इंडिया के रूप में भी सराहा जा रहा है।




