स्फटिक शिवलिंग की पूजा से सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति की मान्यता, बिलासपुर में प्रदेश का पहला स्फटिक शिव मंदिर, प्राण प्रतिष्ठा में उमड़ी हजारों की आस्था

बिलासपुर के सांई परिसर, नूतन चौक, सरकंडा स्थित स्फटिकेश्वर महादेव धाम इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में स्थापित स्फटिक शिवलिंग को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना गया है। मान्यता है कि इसकी पूजा-अर्चना से आर्थिक तंगी दूर होती है, कर्ज से मुक्ति मिलती है और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्फटिक शिवलिंग की पूजा से स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही राहु, शनि, पितृदोष एवं कालसर्प दोष जैसे ग्रह दोषों के निवारण में भी रुद्राभिषेक को प्रभावी माना गया है। यह शिवलिंग निर्गुण ब्रह्म का प्रतीक होने के कारण साधकों को ध्यान की उच्च अवस्था तक ले जाने में सहायक माना जाता है।मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक अमित तिवारी के अनुसार देशभर में इस प्रकार के केवल छह मंदिर हैं और बिलासपुर का यह मंदिर सातवां तथा प्रदेश का पहला स्फटिक शिव मंदिर है, जो शहर के लिए गौरव का विषय है। हिमालयन क्वार्ट्ज से निर्मित इस शिवलिंग को जयपुर में तराशा गया है, जिसकी लंबाई 18 इंच, गोलाई 24 इंच और वजन 51 किलोग्राम है।हाल ही में 29 से 31 मार्च तक तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन में कलश यात्रा, विभिन्न अधिवास, 51 जड़ी-बूटियों से अभिषेक, रुद्राभिषेक और महाआरती के साथ विशाल भंडारा भी हुआ। बनारस से आए आचार्यों और नागा साधुओं की उपस्थिति इस आयोजन का विशेष आकर्षण रही।

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