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Monday, April 6, 2026
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मसीहियों के 40 दिन का लैंट पर्व प्रारम्भ हुआ. K चर्च ऑफ खाईष्ट सी.एम.डी चौक के पास्टर सुदेश पॉल ने जानकारी देते हुये बताया कि

मसीहियों के 40 दिन का लैंट पर्व प्रारम्भ हुआ

K चर्च ऑफ खाईष्ट सी.एम.डी चौक के पास्टर सुदेश पॉल ने जानकारी देते हुये बताया कि

प्रभु यीशु ने जो यातनाएं और दुख उन्होंने सहा, प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाये जाने पहले, उसी वेदना और पीड़ा को स्मरण करते, मसीही जनों द्वारा 40 दिनों का उपवास रख कर ईश्वर के प्रति अपने आपको समर्पित करते हुने भक्ति पूर्ण जीवन जीने का प्रयास किया जाता है। मसीहियों का लेंट (उपवास) पर्व 40 दिनों का होता है ये 14 फरवरी से प्रारम्भ होकर 24 मार्च तक चलेगा । चालीस दिनों के उपवास काल का संबंध धर्मशास्त्र के चालीस अंको पर आधारित है।

बाइबल के पुराने विधान में, जब जलप्रलय से पृथ्वी नष्ट हुई थी तब चालीस दिन और रात वर्षा हुई थी। । इस्राएली लोग जंगल में चालीस वर्ष तक भटकते रहे। सिने पर्वत पर मुसा नबी परमेश्वर से वार्तालाप करते ह‌ुये चालीस दिन तक निराहार रहे। एलिय्याह नबी एक रोटी और सुराही का पानी पीकर चालीस दिन की यात्रा पूरी कर होरेब पर्वत पर पहुँचा। निनने नगर के लोगों ने चालीस दिन उपवास रखकर ईश्वर को प्रशन्न किया और अपने नगर को नाश होने से बचा लिया। प्रभु यीशु मसीह बपतिस्मा लेकर चालीस दिन- रात जंगल में निराहार रहे। यीशु मृतकों में से जीवित होने के बाद, ठोस प्रमाण सहित लोगों को 40 दिनो तक दिखाई देते रहे।

इन्ही संदर्भों पर आधारित मसीहियों में 40 दिन का लेंट (उपवास) पर्व मनाया जाता है। पास्टर पॉल ने बताया कि विगत उन्नीस वर्षों से चालीस परिवारों में प्रति संध्या प्रार्थना आराधना होती है। संचालक द्वारा आराधना का संचालन होता है। क्वायर ग्रुप के नव जवानों द्वारा मसीही गीतों की भक्ति पूर्ण प्रस्तुति दी जाती हैं। उपदेशक द्वारा प्रवचन प्रचारित किये जाते हैं।

40 दिनों तक लोग उपवास रखकर अपने मनों को ईश्वर पर केंद्रित करते हैं। सांसारिकता छोड़‌कर प्रतिदिन बाइबल पढ़ते प्रार्थना करते, अपने पाप, अपराध, गुनाहों की माँफी मांगते, भलाई करते, एक दूसरे की सहायता करते और अपने व्यवहार से ईश्वर को प्रशन्न करते हैं। कार्यक्रम की -सफलता में शामूएल वालेस, मुकेश पॉल, प्रवीण जैसल, विल्सन जान, अरविन्द कुमार, सनी जान, राकेश पॉल, राहूल जान, मनीष दास, मंजू निशा, अरुणा दास सुनीता मसीह, शीबा लुईस, मधुबाला, सरिता पॉल मार्ग्रेट पॉल एंजलिना पाल, मीनू सिह, अरूणा कुमार, रीना दास, सुनीता डेनिएल, आदि का सराहनीय योगदान है।

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