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शहर में इस साल होलिका की तैयारी पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया।

गोबर से बने कंडे का भी इस बार ज़्यादा से ज़्यादा ईस्तेमाल किया जा रहा है

भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है होली। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक होलिका दहन की तैयारी महीनेभर पहले से शुरू हो जाती है। सुखी लकड़ियां इकठ्ठा करके फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। इस बार 24 मार्च को होलिका दहन और 25 मार्च को धुलेंदी मनाई जाएगी।

शहर के विभिन्न मुहल्लों में होलिका बन कर तैयार हो गई है। पर्यावरण के मद्देनज़र इस बार लोग पहले से थोड़ी छोटी आकार की होलिका बना रहे हैं, साथ ही गोबर से बने कंडे का भी इस बार ज़्यादा से ज़्यादा ईस्तेमाल किया जा रहा है ताकि लकड़ियां भी कम लगें और पर्यावरण पर भी कम से कम प्रभाव पड़े।

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