

बिलासपुर – जश्ने जश्न ईद मिलादुन्नबी पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब का जन्म का उत्सव है।इसलिए इस खास मौके पर बिलासपुर में आगाज़ एजुकेशन सोशल हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आयोजनकर्ताओं ने बताया कि यह शिविर विगत दस वर्षों से लगातार हर साल ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों और ऐसे मरीजों को रक्त उपलब्ध कराना है, जिन्हें हर दस से पंद्रह दिन में रक्त की आवश्यकता पड़ती है।इस वर्ष भी रक्तदान शिविर में अनेक लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। साथ ही रक्तदाताओं की निःशुल्क स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच भी की गई। आयोजन के दौरान लोगों ने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा मानव धर्म है और इंसानियत की सेवा का प्रतीक है।आगाज़ फाउंडेशन के संरक्षक खालिद खान ने बताया कि इस शिविर का मकसद सिर्फ रक्तदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों को हर संभव मदद पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन नबी-ए-करीम की जीवनशैली और इंसानियत की शिक्षा से प्रेरित है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि इस्लाम का संदेश है कि एक इंसान की जान बचाना पूरी मानवता को बचाने के बराबर है। इसी शिक्षा को ध्यान में रखते हुए हर साल रक्तदान शिविर का आयोजन कर जरूरतमंद मरीजों की मदद की जाती है।इस अवसर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने रक्तदाताओं को स्वस्थ जीवनशैली और खानपान के महत्व पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित फिटनेस की आदतें शरीर को मजबूत और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाती हैं।आयोजन में मौजूद लोगों ने आगाज़ एजुकेशन और उसकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल जरूरतमंदों के लिए जीवनदायिनी साबित होते हैं, बल्कि समाज में भाईचारे और मानवता की भावना को भी बढ़ावा देते हैं।

जश्ने ईद मिलादुन्नबी के इस मौके पर आयोजित रक्तदान शिविर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं। जरूरतमंदों की मदद कर लोगों ने पैगंबर की शिक्षा को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।




