
बिलासपुर में हवाई सेवा विस्तार को लेकर चल रहा जनसंघर्ष अब छह वर्ष पूरे कर चुका है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी भी दूर हैं। एयरपोर्ट जनसंघर्ष समिति का कहना है कि इतने लंबे समय से लगातार आवाज़ उठाने के बावजूद सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। समिति के अनुसार बिलासपुर जैसा प्रमुख शहर आज भी हवाई सुविधा के लिए रायपुर या अन्य शहरों पर निर्भर रहने को मजबूर है, जो क्षेत्र की प्रगति में बाधा है। समिति के सदस्यों ने अपने बयान में कहा कि बिलासपुर के जनप्रतिनिधि इस दिशा में पर्याप्त मजबूती से आवाज़ नहीं उठा पाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क से लेकर संसद तक बिलासपुर के मुद्दों को उतनी ताकत से नहीं रखा गया, जितनी आवश्यकता थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब क्षेत्र से केंद्रीय राज्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे प्रभावशाली नेता मौजूद हैं, तो फिर भी एयरपोर्ट विकास की मांगों का अधूरा रहना चिंताजनक है। मुख्य मांगों में बिलासपुर एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी का दर्जा दिलाना और पहले से अधिग्रहित जमीन को पूर्ण रूप से सेवा में लाना शामिल है। समिति का दावा है कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष अब देश का सबसे लंबा हवाई सेवा आंदोलन बन चुका है, जो लगातार छह साल से चल रहा है और अब भी थमने का संकेत नहीं दे रहा। समिति सदस्यों ने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों को कई बार आश्वासन दिया गया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका मानना है कि यह केवल हवाई सेवा का प्रश्न नहीं, बल्कि बिलासपुर की गरिमा और सम्मान का मुद्दा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि तत्काल 4सी एयरपोर्ट की स्वीकृति दी जाए और शहर को बेहतर और नियमित हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ा जाए।




