बिलासपुर की तोरवा कृषि उपज मंडी में आज बड़ी संख्या में फल-सब्जी व्यापारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर मंडी सचिव से मुलाकात की। व्यापारियों का कहना है कि उनके लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है, लेकिन पोर्टल सही से काम नहीं कर रहा, जिससे वे अपना लाइसेंस नहीं बना पा रहे। व्यापारियों ने मंडी प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाए। हमारे कैमरे में कैद यह तस्वीरें तोरवा कृषि उपज मंडी की हैं, जहां गुरुवार 3 अप्रैल को फल और सब्जी व्यापारियों की भारी भीड़ उमड़ी है।व्यापारी मंडी प्रशासन से अपनी मांगों को लेकर बातचीत करने पहुंचे थे।व्यापारियों का कहना है कि उनका व्यापारिक लाइसेंस हर पांच साल में नवीनीकरण करवाना अनिवार्य होता है, लेकिन इस बार नवीनीकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे उन्हें काफी दिक्कतें आ रही हैं।व्यापारियों के अनुसार मंडी बोर्ड द्वारा बनाए गए पोर्टल में लॉगिन करने के बाद भी वे अपने दस्तावेज अपलोड नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उनका लाइसेंस नहीं बन पा रहा है।व्यापारियों ने बताया कि पहले यह प्रक्रिया मैन्युअली होती थी, जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती थी,,लेकिन अब ऑनलाइन प्रक्रिया लागू करने के बाद भी पोर्टल सही से काम नहीं कर रहा है।व्यापारी मंडी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि या तो इस प्रक्रिया को पहले की तरह मैन्युअली कर दिया जाए या फिर मंडी अधिकारी खुद व्यापारियों के साथ बैठकर लाइसेंस नवीनीकरण करने में सहयोग करें।मंडी व्यापारियों का कहना है कि जब वे पोर्टल पर लॉगिन करते हैं तो जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बावजूद भी उनका आवेदन स्वीकार नहीं हो रहा।कई बार कोशिश करने के बावजूद भी लाइसेंस नहीं बन पा रहा है।व्यापारियों का आरोप है कि इस समस्या का समाधान निकालने के बजाय मंडी प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।इसी वजह से पूरे 143 फल एवं सब्जी व्यापारी अपनी मांगों को लेकर मंडी पहुंचे। जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष एवं फल मंडी के अध्यक्ष ने सचिव से अनुरोध किया कि व्यापारियों से लाइसेंस शुल्क लेकर जल्द से जल्द उनके लाइसेंस बनाए जाएं। व्यापारियों ने मंडी में अन्य समस्याओं को भी उठाया। उनका कहना था कि मंडी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मवेशी घूमते रहते हैं, जिससे व्यापार में दिक्कतें आती हैं। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की कि मंडी के पास स्थित जमीन पर एक गौशाला बनाई जाए, ताकि इन मवेशियों को वहां रखा जा सके और मंडी की सफाई व्यवस्था बेहतर हो सके। व्यापारियों का कहना था कि वे गौसेवा के लिए भी तैयार हैं, लेकिन मंडी क्षेत्र में पशुओं का खुलेआम घूमना व्यापार के लिए समस्या बन रहा है।वहीं, जब मंडी सचिव से व्यापारियों की मांगों और ऑनलाइन प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों पर सवाल किया गया तो उन्होंने समस्या को मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है और व्यापारियों को कोई समस्या नहीं हो रही। लेकिन व्यापारियों का आरोप है कि मंडी सचिव उनके मुद्दों को हल करने की बजाय टाल रहे हैं और कोई ठोस समाधान नहीं निकाल रहे। सबसे बड़ा विवाद मंडी लाइसेंस के नवीनीकरण शुल्क को लेकर सामने आया। व्यापारियों का आरोप है कि नवीनीकरण के लिए निर्धारित 5000 रुपये के अलावा अतिरिक्त 5000 से 7000 रुपये की मांग की जा रही है। हालांकि, मंडी सचिव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि किसी भी व्यापारी से अतिरिक्त राशि नहीं ली जा रही है। बहरहाल देखने वाली बात होगी कि मंडी प्रशासन व्यापारियों की मांगों पर कितना अमल करता है।क्या पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर किया जाएगा, ताकि व्यापारी आसानी से लाइसेंस बना सकें और क्या मंडी क्षेत्र में मवेशियों की समस्या का कोई समाधान निकलेगा।फिलहाल तिफरा फल एवं सब्जी मंडी के व्यापारियों ने अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं को लेकर जरूर सचिव से मुलाकात कर उन्हें अवगत करवा दिया है।लेकिन सवाल यही है कि आखिर मांगे कबतक पूरी होगी या फिर व्यापारियों को कोई और कदम उठाना पड़ेगा।




