
सोमवार देर रात तीन बजे चिरमिरी से रेस्क्यू कर लाई गई बाघिन को अचानकमार टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। बाघिन को पहले बेहोश किया गया और फिर उसे सुरक्षित पिंजरे में बंद कर यहां तक पहुंचाया गया। इस कदम की जरूरत तब पड़ी जब बाघिन को रेलवे ट्रैक और शहर के करीब देखा गया, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। बाघिन की सुरक्षा के लिए चार टीमें बनाई गई थी। हर टीम में 15 सदस्य हैं, जो आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाघिन सुरक्षित रूप से नए माहौल में ढल सके।

आपको बता दें कि इससे पहले सूरजपुर वनमंडल से लाई गई एक बाघिन ने अचानकमार में दो शावकों को जन्म दिया था और इसे अपना स्थायी ठिकाना बना लिया था। अब इस नई बाघिन के आने से अचानकमार में बाघों की संख्या 15 तक पहुंच गई है। वन विभाग को उम्मीद है कि इससे बाघों का कुनबा और मजबूत होगा।अचानकमार टाइगर रिजर्व की सुरक्षा और बाघों के संरक्षण के ये प्रयास वाकई सराहनीय हैं। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है।




