छत्तीसगढ़ में प्राचार्य प्रमोशन का मामला फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है।इस बार याचिका में प्राचार्य पद के लिए बीएड डिग्री अनिवार्य करने की मांग की गई है।वहीं प्राचार्य पदोन्नति फोरम ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर तर्क दिया है कि यह प्रशासनिक पद है, जिसमें बीएड की अनिवार्यता जरूरी नहीं।इससे पहले भी बीएड शिक्षकों की भर्ती को लेकर विवाद हुआ था,जहां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने बीएड धारकों की सहायक शिक्षक भर्ती को अवैध करार देते हुए डीएलएड उम्मीदवारों की नियुक्ति के आदेश दिए थे।याचिकाकर्ता लेक्चरर अखिलेश त्रिपाठी ने दलील दी है कि जिस तरह हाई और हायर सेकेंडरी शिक्षकों के लिए बीएड अनिवार्य है,वैसे ही प्राचार्य प्रमोशन में भी यह योग्यता होनी चाहिए।दूसरी ओर फोरम ने कहा कि 2014 के भर्ती नियमों के अनुसार यह शर्त प्राचार्य पद पर लागू नहीं होती।इससे पहले भी प्राचार्य प्रमोशन विवाद हाईकोर्ट पहुंचा था, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई थी।कोर्ट ने तब कहा था कि पदोन्नति संवैधानिक अधिकार नहीं है।राज्य सरकार अब नए नियमों के तहत पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।




