
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की गति शक्ति इकाई नागपुर ने रेलवे अवसंरचना विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश के बालाघाट–वारासिवनी रेलखंड पर समपार संख्या BK-25 के स्थान पर बनाए जा रहे रोड ओवर ब्रिज के निर्माण के दौरान 72 मीटर स्पान और लगभग 760 मीट्रिक टन वजनी बो-स्ट्रिंग गर्डर को अभिनव तकनीक से सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।घनी आबादी वाले वारासिवनी क्षेत्र में सीमित कार्यस्थल, स्क्यू एलाइनमेंट, रेलवे लाइन के पास भवनों की मौजूदगी और परिचालन सुरक्षा जैसी चुनौतियों के कारण पारंपरिक तरीके से गर्डर लॉन्चिंग करना कठिन था।

सामान्य परिस्थितियों में इस तरह के कार्य के लिए लंबे समय तक स्पीड रेस्ट्रिक्शन और कई ट्रैफिक ब्लॉक लेने पड़ते हैं, जिससे ट्रेन संचालन प्रभावित होता है।इन चुनौतियों को देखते हुए रेलवे ने 1600 मीट्रिक टन क्षमता वाली क्रॉलर माउंटेड क्रेन के माध्यम से गर्डर को सीधे उठाकर निर्धारित स्थान पर स्थापित किया। इस तकनीक से पूरा कार्य केवल एक ट्रैफिक-कम-पावर ब्लॉक में ही पूरा कर लिया गया। यह पहली बार है जब भारतीय रेल में इतने भारी बो-स्ट्रिंग गर्डर को स्थापित करने के लिए इतनी बड़ी क्षमता की क्रॉलर क्रेन का उपयोग किया गया है, जो भविष्य में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अवसंरचना परियोजनाओं के तेज और सुरक्षित क्रियान्वयन के लिए नया मानक स्थापित करेगा।




