शीतला अष्टमी 22 मार्च से शुरु हो गया है। शंकर नगर में 75 वर्षों से पूजा-अर्चना की जा रही है। शंकर नगर शीतला समिति शीतला अष्टमी पर तीन दिवसीय पूजा कार्यक्रम कर रही है। शुक्रवार को शाम 6 बजे माता की प्रतिमा पंडाल में स्थापित कर दी गई। वहीं 22 मार्च को भक्त सुबह से शाम तक मां शीतला को ठंडे पकवान का भोग अर्पित किये। वहीं 23 और 24 मार्च को 16 पहर हरि नाम संकीर्तन होगा। इसमें पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा से कलाकार पहुंचें है। 25 को मां को विदाई दी जाएगी। इसके अलावा शीतला पूजा हेमू नगर, विनोबा नगर, सरकंडा, सिम्स परिसर स्थित श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर मे हो रही है। समिति के सदस्य ने बताया कि शहर में सबसे पहले शंकर नगर में मां शीतला की पूजा शुरू हुई थी। इस वर्ष पूजा उत्सव का यह 75वां वर्ष है। इस पर्व की मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से घर-परिवार में चेचक रोग, दाह, पित्त ज्वर, आंखों की सभी बीमारियां, मौसमी बीमारियां शीतला जनित समस्याएं दूर हो जाती हँं। भक्त रोगों से मुक्ति पाने और भविष्य में ऐसे रोगों से अपने परिवार के लोगों को बचाने पूजा-पाठ करते हैं। उन्होंने बताया कि मां शीतला की पूजा का धार्मिक महत्व तो है ही, इसके साथ ही वैज्ञानिक नजरिए से भी ये पर्व महत्वपूर्ण है। दो ऋतुओं के संधिकाल में खान-पान का खासतौर से ध्यान रखना चाहिए। भोग के साथ बासी खाने के फायदे भी है। बासी खाना ठंडा होने के कारण पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता। बासी चावल और दही में प्राकृतिक रूप से प्रो-बायोटिक्स होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे सर्व माने जाते हैं। साथ ही खाने में ऊ्जां बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैँ। शंकर नगर शीतला पूजा समिति द्वारा हर वर्ष की तरह इस बार भी भक्तिभाव से शीतला पूजा का आयोजन किया गया है जिसमें रविवार की शाम से अखंड कीर्तन पाठ किया जाएगा जो 24 घंटे तक चलेगा इसके बाद माँ को विदाई दी जाएगी।




