नवरात्रि प्रारंभ होने वाली है इस शुभ अवसर पर भक्त माता रानी की विधि विधान से पूजा तो करते ही है इसके साथ ही माता के भजनों को खूब सुना गाया जाता है। बिलासपुर के जरहाभाटा जतीया तालाब के पास रहने वाले घसीया समाज के द्वारा हर वर्ष इसके लिए मांदर ढोलक तैयार किया जाता है। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार घसीया समाज के द्वारा माता रानी के जगराते में एवं भजन में बजने वाले ढोल यहीं से तैयार होते हैं। नवरात्रि को कुछ ही दिन बचे हैं। मांदर ढोल की तैयारी जोरों शोरों से चल रही है। ढोल बनाने वाले कारीगर ने बताया कि हमारे दादा परदादा के जमाने से इसी प्रकार मांदर ढोल हमारे द्वारा बनाया जाता है। बिलासपुर में सिर्फ जराभाटा में ही मांदर ढोल बनते हैं। इसके साथ ही हमारे यहां से दुकानदार भी मांदर ढोल खरीदने आते हैं और अपने दुकानों में बेचते हैं।

वर्षों से चली आ रही परंपरा आज भी बिलासपुर वाशी त्योहार में परंपराओं को बरकरार रख ढोल नगाड़े की खरीदी जोरों शोरों से करते हैं। यही कारण है कि सांस्कृतिक धरोहर आज भी जिंदा है। वर्तमान समय में मांदर ढोल की कीमत 5000 से ₹8000 तक की है त्योहारों के समय इसकी डिमांड बढ़ जाती है।





