
बिलासपुर में फर्जी डिग्री पर डॉक्टर बनकर इलाज करने वाले नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ एन. जॉन से पुलिस ने पूछताछ की कार्रवाई पूरी कर ली है। आरोपी डॉक्टर से एक दिन की रिमांड में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। अब पुलिस उसकी डिग्री की जांच के साथ-साथ अपोलो अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच में जुट गई है।एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि आरोपी डॉक्टर के सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं।पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि उसने बिना किसी मान्यता के इलाज किया और वर्षों तक अपोलो जैसे बड़े अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट के रूप में कार्य किया।पुलिस अब जुटाए गए तथ्यों के आधार पर केस को मजबूत कर रही है।एसएसपी ने कहा कि जांच में उसके सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं।हमने उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और डिग्री एवं अस्पताल से जुड़े अन्य बिंदुओं पर भी जांच जारी है।सरकंडा थाना में दर्ज एफआईआर के आधार पर अब अपोलो अस्पताल प्रबंधन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।पुलिस जल्द ही उन अधिकारियों से पूछताछ करेगी जिन्होंने नरेंद्र जॉन की भर्ती की थी।प्रशासनिक लापरवाही और संभावित मिलीभगत के एंगल से भी जांच की जा रही है।

डॉ नरेंद्र विक्रमादित्य को पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दोबारा दमोह जेल भेज दिया गया।पूछताछ में उसने दावा किया है कि उसने एमबीबीएस की पढ़ाई कोलकाता और पीजी की डिग्री दार्जिलिंग से की है, साथ ही यूके व यूएस में नौकरी और पढ़ाई का झूठा दावा भी किया।पुलिस अब आरोपी द्वारा बताए गए शिक्षण संस्थानों से उसकी डिग्रियों का सत्यापन करेगी।इसके साथ ही अपोलो अस्पताल से भर्ती प्रक्रिया,दस्तावेजों और नियुक्ति से जुड़ी हर जानकारी जुटाई जा रही है।आरोपी 2006 में अपोलो में पदस्थ था और उस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का इलाज भी कर चुका है।

फिलहाल फर्जी डॉक्टर मामले में एक ओर जहां आरोपी की असलियत सामने आ रही है, वहीं अपोलो जैसे बड़े अस्पताल की जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं।अब देखना होगा कि इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल अन्य जिम्मेदारों तक पुलिस कैसे पहुंचती है।




