
सीपत–बलौदा से कोरबा तक की 87 किलोमीटर लंबी सड़क बदहाल हालत में पहुंच चुकी है।जगह जगह गड्ढे, उड़ती धूल और उखड़ी परतों के कारण यह मार्ग दुर्घटनाओं का खतरा बन गया है। दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही से हालात और खराब होते जा रहे हैं, जिससे सड़क किनारे बसे गांवों के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।हैरानी की बात यह है कि इस सड़क के निर्माण और मरम्मत से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड पीडब्ल्यूडी के पास उपलब्ध नहीं है। विभागीय अधिकारियों के पास यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि किन हिस्सों में कब और कितना काम हुआ। इसी वजह से मरम्मत की प्रक्रिया बार-बार अटक रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह सड़क मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति झेल रही है।बरसात में गड्ढे तालाब बन जाते हैं, वहीं गर्मी में उड़ती धूल से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर मरीजों और रोजाना सफर करने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।जानकारों के मुताबिक सड़क के पुनर्निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया में भी देरी हो रही है, जिससे समस्या और लंबी खिंचती जा रही है। जब तक ठोस योजना और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक यह सड़क आम लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनी रहेगी।




