
बस्तर – दशहरा समिति की बैठक जिला कार्यालय के प्रेरणा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में नए उपाध्यक्ष का चुनाव किया गया, जिसमें बलराम मांझी को सर्वाधिक मांझी की सहमति मिली। इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप ने नवनियुक्त उपाध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि बस्तर दशहरा हमारी बहुत पुरानी परंपरा और संस्कृति है, हमारे पूर्वजों ने आमचो बस्तर की स्थानीय संस्कृति, रीति- रिवाज, लोक परंपरा को सहेजकर रखा है। हमे भी इस परंपरा- संस्कृति को संरक्षित करना है। संस्कृति को जीवित रखने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।दशहरा में सभी समाज की सहभागिता रहती है, दशहरा में अलग-अलग समाज अपने दायित्व का निर्वहन करते है यह सामाजिक एकता का प्रतीक है। दशहरा पर्व के ऐतिहासिक स्थलों का राजस्व रिकार्ड के आधार पर संरक्षित किया जाना है।बस्तर दशहरा के आयोजन समिति के बैठक के उपरांत अतिथि और मांझी, चालकी के द्वारा नकटी सेमरा में स्थित दशहरा वन स्थल में पौधरोपण किया गया। यह पौधें बस्तर दशहरा में उपयोग की जाने वाली लकड़ी फुल से संबंधित पौधों का रोपण किया गया है। ज्ञात हो कि बस्तर दशहरा हेतु प्रति वर्ष रथ निर्माण के लिए लगभग 200 पेड़ काटा जाता है। रथ निर्माण के लिए कोमी, घमन, पारा, मगरमुही जैसे विभिन्न किस्मों के पेड़ो को काटा गया है। इन पेड़ो की प्रतिपूर्ती हेतु बस्तर दशहरा पर्व के अन्तर्गत वृक्षारोपण कार्य एक पेड़ बस्तर के देवी-देवताओं के नाम के माध्यम से विभिन्न किस्मों के सामाजिक पुज्यनीय पौधे जैसे साजा आदन, साल (सरगी), महुआ, आम, कसी, सियाडी, भेलवा, सिवना, आम, छिंद, सल्फी बेल, नीम, आंवला, पलास, फरसा, कुड़ई, हजारी कनेर,तेंदू, कुसुम, सागौन, बांस, जामून एवं अन्य प्रकार के पौधे का रोपण किया गया है।




