आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य सेबस्तर पंडुम कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए।जहां उन्होंने बस्तर के विकास को पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकार का एक ही उद्देश्य है और वो है बस्तर का विकास। छत्तीसगढ़ की अनूठी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से ‘‘बस्तर पंडुम का भव्य आयोजन 12 मार्च से शुरू किया गया था ।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप इस आयोजन के माध्यम से बस्तर संभाग की समृद्ध लोककला, रीति-रिवाज, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।यह महोत्सव न केवल बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को एक मंच प्रदान करेगा, बल्कि उनकी कला को नई पहचान और प्रोत्साहन भी देगा.इसी कड़ी में शनिवार को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए।जहां उन्होंने बस्तर पंडुम के अवसर पर आयोजित अद्भुत जनजातीय कला और संस्कृति को दर्शाती प्रदर्शनी का अवलोकन किया।वही उन्होंने बस्तर की संस्कृति, बोली, गान, वाद्य यंत्र, पेय पदार्थ, भोजन, नृत्य, छत्तीसगढ़ के साथ-साथ भारत की संस्कृति का गहना है इस मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अब बस्तर नक्सल से मुक्त होने जा रहा है । और अगर क्षेत्र नक्सल मुक्त होगा तो यहां तेजी से विकास हो सकेगा।उन्होंने कहा कि देशभर के जितने भी राजदूत भारत की राजधानी में मौजूद है उन सबको भारत की संस्कृति से अवगत कराने के लिए सभी राज्यों में ले जाकर भ्रमण कराएगे।जिससे वे भारतीय संस्कृति से अवगत हो सके। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के स्थानीय संस्कृति और कला को बढ़ावा देने की कोशिश की सराहना की।12 मार्च से 5 अप्रैल तक आयोजीत कार्यक्रम में जिस तरह से जिला प्रशासन ने सहभागिता दिखाकर इसे सफल बनाया है वह दर्शा रहा है कि अब बस्तर बदलने वाला है ।केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बस्तर के विकास की प्राथमिकता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है और इसके लिए वे प्रतिबद्ध है लेकिन यह तभी संभव हो सकता है जब बस्तर में शांति हो ।लिहाजा उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वह हथियार छोड़ मुख्य धारा में आए उनके संरक्षण और बेहतर जीवन की जिम्मेदारी सरकार की होगी इसके लिए सभी को साथ आना होगा क्योंकि हिंसा किसी भी विकास का समाधान नहीं है। कार्यक्रम में उन्हें बस्तर संस्कृति की स्मृति चिन्ह भी भेंट की गई




