शासन के पैसों का किस तरह दुरुपयोग किया जाता है, इसका एक बड़ा उदाहरण बिरकोना का व्यावसायिक परिसर है। लाखों रुपये की लागत से बना यह परिसर अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। निगम में शामिल होने के बावजूद अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह है बिरकोना का व्यावसायिक परिसर, जिसे लाखों रुपये खर्च कर पंचायत द्वारा बनवाया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में यह आज खंडहर में तब्दील हो गया है। पंचायत से निगम में शामिल होने के बावजूद, कोई भी अधिकारी इस परिसर की सुध नहीं ले रहा। दुकानों की नीलामी नहीं होने से यह परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। यहां लगे शटर तोड़ दिए गए हैं, और कई सामान भी गायब हो चुके हैं। लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। सरकार का उद्देश्य होता है कि ऐसे व्यावसायिक परिसरों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिले, लेकिन जब देखरेख ही नहीं होगी, तो ये परिसर किस काम का? अब सवाल यह उठता है कि निगम प्रशासन आखिर कब इस ओर ध्यान देगा? सरकारी योजनाओं को लेकर अक्सर लापरवाही की खबरें आती हैं, लेकिन जब लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी किसी परिसर का सही उपयोग न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है। उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस ओर ध्यान देगा।




