बिलासपुर पुलिस ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में तीन अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर अहम सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला और पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में की गई। गिरफ्तार आरोपियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से एक शिक्षक को पार्ट-टाइम ऑनलाइन जॉब का झांसा देकर लगभग 48.91 लाख रुपये की ठगी की थी। शिकायतकर्ता सौरभ साहू, जो बेमेतरा जिले के आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल काठियापारा में शिक्षक हैं, ने रेंज साइबर थाना, बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2024 में उन्हें व्हाट्सएप पर तीन अलग-अलग नंबरों से मैसेज मिला। यह संदेश ज्योति कृष्णा, एडवाइजर हेल्सबर्ग और एडवाइजर हर्षद नामक व्यक्तियों द्वारा भेजा गया था। मैसेज में पार्ट-टाइम जॉब का प्रस्ताव दिया गया, जिसमें अच्छा मुनाफा कमाने का दावा किया गया था। सौरभ साहू ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें एक फर्जी वेबसाइट हेल्सबर्ग पर पैसे निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआती दिनों में उन्हें अच्छा मुनाफा दिखाया गया, लेकिन धीरे-धीरे आरोपियों ने सौरभ को अलग-अलग किश्तों में कुल 48.91 लाख रुपये का निवेश करने के लिए मजबूर किया। आरोपियों ने व्हाट्सएप और फर्जी वेबसाइटों का उपयोग करके शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम व्यक्तियों को निशाना बनाया। हेल्सबर्ग नामक फर्जी वेबसाइट के माध्यम से निवेशकों को बड़े लाभ का लालच दिया गया।धोखाधड़ी के लिए 100 से अधिक फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते का उपयोग किया गया। आरोपी टेलीग्राम और बायनेंस ग्रुप का इस्तेमाल कर इन फर्जी खातों और सिम कार्ड को प्राप्त करते थे। रेंज साइबर थाना की टीम ने शिकायत के आधार पर तत्काल कार्रवाई की। शिकायत की जांच के लिए साइबर क्राइम पोर्टल और अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया गया। ठगी की राशि प्राप्त करने वाले बैंक खातों की पहचान की गई।
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जांच की गई। प्राप्त जानकारी से पता चला कि आरोपी महाराष्ट्र के भिवंडी क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। पुलिस निरीक्षक विजय चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम को भिवंडी भेजा गया। टीम ने तीन दिनों तक आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया और स्थानीय पुलिस की मदद से उन्हें गिरफ्तार किया। जिसमे तीन आरोपी शाकिब अंसारी,
मेराज मोहम्मद अकरम अंसारी और फुजैल अहमद अंसारी शामिल है पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे फर्जी बैंक खातों और सिम कार्डों का उपयोग कर ऑनलाइन धोखाधड़ी करते थे।उन्होंने ठगी के लिए ऑनलाईन गेमिंग, ट्रेडिंग, वर्क फ्रॉम होम,रेटिंग रिव्यू,बीमा पॉलिसी और डिजिटल अरेस्ट जैसे विभिन्न तरीकों का सहारा लिया।फर्जी खातों और सिम कार्ड को टेलीग्राम और बायनेंस ग्रुप से 50,000 रुपये प्रति खाता और 1,000 रुपये प्रति सिम कार्ड के दर से खरीदा गया। इन खातों के जरिए 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को यूएसडीटी और क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सबूत और सामग्री बरामद की, जिनमें 11 मोबाइल फोन,12 फर्जी सिम कार्ड,बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक शामिल है। इसके साथ ही 65 लाख रुपये में खरीदी गई 400 वर्ग फीट जमीन का एग्रीमेंट और सोने-चांदी के बिल भी बरामद किया गया। आरोपियों ने 99 दिनों में 15 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया। ठगी की राशि से भिवंडी में जमीन खरीदी। मोबाइल और अन्य उपकरण स्थानीय दुकानों से कम कीमत पर खरीदे गए। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उनसे पूछताछ कर अन्य संभावित आरोपियों और ठगी की रकम का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।




