
बिलासपुर – मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट गरीब और स्लम एरिया के लोगों को मुफ्त इलाज और दवाइयां देने के लिए चलाई जाती है। लेकिन बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में इन यूनिट्स की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। वार्ड क्रमांक 13 में तैनात मोबाइल मेडिकल वैन सिर्फ दिखावे के लिए खड़ी रहती है। न जांच होती है, न इलाज, और न ही दवा मिलती है, जबकि जिम्मेदार इस पर कोई ठोस जवाब नहीं देते। वार्ड क्रमांक 13 में हर हफ्ते लगने वाली इस मोबाइल मेडिकल यूनिट को एक ही जगह पर रखा जाता है। मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें या तो दवा नहीं मिलती, या यह कहकर लौटा दिया जाता है कि स्टॉक खत्म है। शुक्रवार को इलाज नहीं होने और दवाइयां न मिलने से नाराज़ लोगों ने वैन के सामने हंगामा किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या रोज की बन गई है और हर बार उन्हें यही जवाब दिया जाता है कि दवा उपलब्ध नहीं है।वार्ड के लोगों ने कहा हम मरीज आ जाते हैं, लेकिन दवा नहीं मिलती। अधिकारी से बात करना भी मुश्किल है, स्टाफ कहता है उनके पास किसी अधिकारी का नंबर नहीं है।मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत इन मोबाइल यूनिट्स में एमबीबीएस डॉक्टर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स और ड्राइवर मौजूद होने चाहिए। मौके पर ही ब्लड, यूरिन, हीमोग्लोबिन, मलेरिया, एचआईवी और हेपेटाइटिस की जांच होनी चाहिए। लेकिन वार्ड 13 की वैन में यह सब केवल कागज़ों तक ही सीमित है। लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी कि वैन पूरे क्षेत्र में घूमने के बजाय सिर्फ एक ही स्थान पर लगाई जाती है, बाकी लोग इससे वंचित रह जाते हैं। स्टाफ भी कुछ कहने से बचता है।जमीनी हकीकत और योजना के उद्देश्यों में जमीन-आसमान का फर्क साफ दिखाई देता है। सवाल उठता है कि गरीबों को मुफ्त इलाज और दवा देने के नाम पर चल रही इस व्यवस्था की निगरानी कौन करेगा और कब तक लोगों को सिर्फ वादों के भरोसे रखा जाएगा।




