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Saturday, February 28, 2026
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रतनपुर महामाया कुंड में बड़ी लापरवाही उजागर शिकारी के जाल में फंसकर 30 कछुओं की हो गई मौत

रतनपुर महामाया कुंड में मछली पकड़ने के जाल में फंस कर 30 कछुआ की मौत हो गई। इससे मंदिर प्रबंधन और वन विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। वही इस घटना से श्रद्धालु आक्रोशित है।

रतनपुर, जिसे महामाया की नगरी कहा जाता है, आज एक सनसनीखेज घटना का गवाह बना। सुबह-सुबह महामाया कुंड के किनारे 30 मृत कछुओं के मिलने से नगर में हड़कंप मच गया। नवरात्रि की तैयारियों के बीच इस तरह की घटना कई सवाल खड़े कर रही है। ये कछुए जाल में फंसे हुए पाए गए। सवाल यह उठता है कि महामाया कुंड में जाल डालने का साहस किसने किया? ट्रस्ट द्वारा पहले से ही कुंड में कपड़े धोने, नहाने और मछली पकड़ने पर रोक लगी हुई है, फिर भी इतनी बड़ी संख्या में कछुओं का फंसना और मर जाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
मंदिर से बिल्कुल सटे हुए इस कुंड में आखिर किसकी लापरवाही के चलते यह घटना घटी? सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिर मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद क्यों थे? सुरक्षा में तैनात गार्डों ने जाल डालने वालों को क्यों नहीं पकड़ा? कहीं यह ट्रस्ट द्वारा सफाई के नाम पर किया गया कोई कृत्य तो नहीं? क्योंकि ट्रस्ट की निष्क्रियता पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। कुछ दिनों पहले ही शंकर गेट के पास अज्ञात तत्वों द्वारा महामाया मैदान की दुकानों में आग लगा दी गई थी। तब भी सुरक्षा मानकों को लेकर ट्रस्ट की भूमिका संदिग्ध रही थी।
गौरतलब है कि कुछ साल पहले बूढ़ा महादेव कुंड की सफाई के दौरान करीब 50 किलो कछुए निकाले गए थे और उन्हें महामाया कुंड में छोड़ा गया था। कुछ ही दिनों में वे भी मर गए थे। वन विभाग इस मामले में तब भी निष्क्रिय रहा और अब 30 कछुओं की मौत पर भी कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा। रतनपुर के तालाबों में अक्सर लोग कछुओं को पकड़कर महामाया कुंड में छोड़ देते हैं, लेकिन वहां उनके लिए प्राकृतिक आवास नहीं होने के कारण वे जीवित नहीं रह पाते। इस बार तो मामला और भी गंभीर है क्योंकि कछुए जाल में फंसे हुए मिले हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि यह किसी साजिश या लापरवाही का नतीजा है।नवरात्रि पर्व से ठीक पहले इस तरह की घटना प्रशासन और ट्रस्ट के सुरक्षा दावों की पोल खोल रही है। जिस समय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, उसी समय इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?
इस पूरे मामले में महामाया ट्रस्ट, वन विभाग और सुरक्षा व्यवस्था सभी कटघरे में हैं। क्या यह किसी अज्ञात तत्वों की साजिश थी, या फिर ट्रस्ट द्वारा की गई सफाई का नतीजा? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
इधर नगरवासियों की मांग है कि प्रशासन इस मामले की गहराई से जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वरना भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा होने से नहीं रोकी जा सकेंगी।

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