
बिलासपुर में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत के साथ ही किसानों को रसायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर करने का प्रयास तेज हो गया है। यह मिशन भारत सरकार द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वतंत्र केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में पूरे देश में लागू किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती मिशन का उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त, पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ खेती के लिए प्रेरित करना है। मिशन की जानकारी देते हुए कृषि उप पंजीयक पी.डी. हथेश्वर ने बताया कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों को खेती की लागत को कम करने और बाहरी संसाधनों की खरीद पर निर्भरता घटाने में सहायता मिलेगी। इसके जरिए किसानों को अपने संसाधनों के माध्यम से ही खेती करने की दिशा में प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सकेगी। प्राकृतिक खेती का मुख्य उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए उपज में सुधार लाना है। यह खेती पद्धति मृदा इकोसिस्टम को सशक्त बनाती है और भूमि की उर्वरता को बढ़ाने में सहायक होती है। इसके अंतर्गत गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत, और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह योजना किसानों को न केवल रासायनिक पदार्थों के दुष्प्रभाव से बचाती है बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर बनाती है। इससे दीर्घकालिक रूप से किसान और उपभोक्ता दोनों को लाभ होगा। इस पहल के अंतर्गत प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति को अपनाएं। बिलासपुर में इस मिशन की शुरुआत से स्थानीय किसान उत्साहित हैं और कई ने प्राकृतिक खेती अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह मिशन किसानों के लिए एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।




