
बिलासपुर वन मंडल में कार्यरत एक महिला वनकर्मी ने अपने ही विभाग के दो वनरक्षकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए विभाग की कार्यसंस्कृति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। महिला कर्मी का आरोप है कि दोनों वनरक्षक आपस में बातचीत करते हुए उनके और उनके परिवार को लेकर बेहद अभद्र और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। इस घटना ने विभाग के भीतर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर चिंताजनक स्थिति उजागर कर दी है। लिखित शिकायत करने वाली महिला कर्मी के अनुसार 4 मार्च को दोपहर करीब 1 बजकर 47 मिनट पर उनके मोबाइल पर एक मिस्ड कॉल आया। इसी दौरान मोबाइल के वॉइसमेल में एक बातचीत रिकॉर्ड हो गई। आरोप है कि इस रिकॉर्डिंग में वनरक्षक बसंत महिलांगे और भूपेन्द्र डहरिया आपस में बातचीत करते हुए महिला कर्मी और उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं।महिला कर्मी का कहना है कि इस तरह की भाषा और मानसिकता न सिर्फ एक महिला कर्मचारी का अपमान है, बल्कि पूरे कार्यस्थल के माहौल को भी शर्मसार करने वाली है। घटना के बाद वह मानसिक रूप से बेहद आहत हैं और उन्होंने दोनों आरोपित वनरक्षकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग की है।शिकायत में महिला कर्मी ने स्पष्ट रूप से दोनों वनरक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति भी मांगी है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल की बात महज कागजों तक सीमित रह जाएगी। फिलहाल इधर वनमंडल अधिकारी नीरज ने बताया कि महिला कर्मी की शिकायत को कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम से संबंधित आंतरिक शिकायत समिति को भेज दिया गया है। महिला द्वारा उपलब्ध कराए गए वॉइस रिकॉर्डिंग समेत सभी साक्ष्यों की जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोनों वनरक्षकों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




