बिलासपुर आधुनिकता चकाचौंध और शहरीकरण अब हर क्षेत्र मे हावी होता नजर आ रहा है,विकास के साथ कुछ जीवों का हम विनाश भी कर रहें हैं। समय के साथ साथ कुछ पक्षियों के जीवन भी संकट से जुझ रहा है,घरों मुहल्लो से अपना बसेरा बनाने वाली नन्ही पक्षी गौरैया अब अपना जीवन तलाशने लोगो से दूरी बना रही है, ऐसे में हमारे बीच इन पक्षियों का नहीं दिखना गंभीर चिंता का विषय है या फिर यूं कहे की इनकी आस्तित्व संकट में है हमे जरूरत है इसे समझने और सहेजने की। पूरे विश्व में हर साल विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है वर्तमान समय में हमारे और आपके घरों के आसपास चहचहाने वाली इन नन्ही चिड़िया की घटती आबादी को लेकर अब हमें जागरुक होने की आवश्यकता है इनके संरक्षण के तौर पर हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
बता दे की सुबह भोर से गांवो,शहरों के व्यस्ततम गलियों मे इन चिड़ियों की चहचहाट से लोगों की खुशियां दोगुनी हो जाती थी घरों के भीतर मंदिरों और पेड़ों में ज्यादातर इनका बसेरा था लेकिन समय के साथ इनकी संख्या तेजी से घटती जा रही है अब यू कहा जाए की एक तरह से ये विलुप्त होते जा रहे है इसके पीछे हम कई कारण समझ सकते हैं जिनमें आधुनिक जीवनशैली, शहरीकरण क्रांक्रिटीकरण, बढ़ती वाहनों से निकलने वाला धुवा,औद्योगिक प्रदूषण के साथ कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग इलेक्ट्रो मैग्नेटिक विकिरण मोबाइल टावरो के विकिरण सब इनके कारण हो सकतें हैं कभी सैकड़ो के संख्या में हमारे घरों के आसपास मंडराने और हमारे बीच रहने वाले इन खूबसूरत चिड़ियों का हमारे बीच से दूर होना गंभीर चिंता का विषय है।घरो गली मुहल्लो के साथ वनों में भी इसकी कमियां अब महसूस हो रही है। इन पक्षियों के लिए हमें समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए ताकी इन्हे सरंक्षण मिल सकें।




