नागलोक जशपुर, जहां जहरीले सांपों की भरमार है, वहां सर्पदंश से मौतें सिर्फ 96 के मामले है। लेकिन बिलासपुर में वही आंकड़ा 431 तक पहुंच गया है। क्या बिलासपुर में कोई नया नागवंश पैदा हो गया, जो सिर्फ सरकारी कागजों में दिखता है या फिर यह मुआवजे की लूट का सबसे बड़ा खेल है। जिसको लेकर अब विधानसभा में मामला उठा है। बड़ा सवाल यह है कि क्या सच में इतने लोगों को सांप ने डसा, या फिर कुछ सफेदपोशों ने सरकारी खजाने को डस लिया। एक तरफ जशपुर, जिसे नागलोक कहा जाता है, जहां हर साल असली सांपों का खौफ रहता है। दूसरी तरफ बिलासपुर, जहां अब कागजी सांपो का आतंक दिख रहा है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं जशपुर में 2022 से 2024 तक सर्पदंश से कुल 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि बिलासपुर में यह आंकड़ा 431 तक पहुंच गया। बिलासपुर मे 2022 में 46 मौतें हुईं। 2023 में 51 मौतें दर्ज हुईं। 2024 में यह संख्या 50 तक पहुंच गई। और 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 11 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। अब सवाल यह उठता है क्या बिलासपुर में सच में कोई नया नागवंश पैदा हो गया, जो सिर्फ सरकारी कागजों में नजर आता है या फिर यह एक ऐसा खेल है, जहां मौतों का इस्तेमाल कर मुआवजे की बंदरबांट की जा रही है बिलासपुर में अब तक 431 सर्पदंश मौते हो चुके है।लेकिन जब यह आंकड़ा विधानसभा में गूंजा, तो बड़ा खुलासा हुआ। भाजपा विधायक शुशांत शुक्ला ने सरकार से पूछा क्या ये असली सांपों का हमला था या सरकारी तंत्र की चालाकी। आरोप है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में 17 करोड़ 24 लाख की मुआवजा लूट हुई, जहां सामान्य मौतों को भी ‘सर्पदंश’ दिखाकर सरकारी पैसे की बंदरबांट की गई सबसे चौंकाने वाला सवाल यह है क्या फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाकर डॉक्टरों ने भी इस खेल में भूमिका निभाई है? क्या बिलासपुर में सच में सांपों का आतंक था, या फिर ये ‘कागजी सपेरों’ की साजिश थी। 431 मौतें, 17 करोड़ की लूट और फर्जी रिपोर्ट्स। सवाल ये है कि ये घोटाला बेनकाब होगा या फिर सपेरों की बीन पर नाचते-नाचते फाइलों की टोकरी में कैद रह जाएगा




