शिव दुर्गा उत्सव समिति द्वारा भव्य तरीके से दुर्गा पूजा उत्सव आयोजित किया गया है। जिसमें आदिवासी परंपरा के पारंपरिक कला के इस्तेमाल से पूरे पंडाल को सजाया गया है। पंडाल की दीवारों पर बास की टुकनी सुपा और थर्मोकोल से आदिवासी डिजाइन बनाया गया है। इसके साथ ही इनमें फूल पत्तियों के चित्र आदिवासी कला के उपयोग से बनाया गया है।

जो देखने में मनमोहन नजर आ रहै है। यहां आदिवासियों के गतिविधि, समाजिक रहन-सहन, वेश भुषा एवं राजतंत्र का प्रारूप देखने को मिल रहा है। इसके अलावा आदवासियों में जो नृत्य हाेते हैं उसे भी दर्शाया गया है। पंडाल में प्रवेश करने के बाद दर्शकों को महसुस होगा कि वे आदिवासियों के बीच पहुंच गए हैं।

आदिवासी कल्चर से संबंधित सभी गतिविधियों जैसे आदिवासी रहन-सहन, नृत्य आदि यहां दर्शाया गया है। पंडाल मे पूरी तरह आदिवासी तरीके से सजावट की गई है। जो देखने में आकर्षक नजर आ रही है। पंडाल की शुरुआत में आदिवायो द्वारा स्वागत किया जा रहा है। इसके साथ ही देवी मां की प्रतिमा भी मनमोहन नजर आ रही है। शहर के हर क्षेत्र में दुर्गा उत्सव की धूम देखी जा रही है जहां श्रद्धालुओं को अलग-अलग थीम के पंडाल में माता रानी के दर्शन प्राप्त हो रहे हैं।




