
रविवार को सिरगिट्टी क्षेत्र में एक ऐसी परीक्षा देखी गई, जो किताबों में नहीं, हालातों से ली जा रही थी। छत्तीसगढ़ व्यापम की भर्ती परीक्षा में शामिल होने पहुंचे परीक्षार्थियों को जलजमाव से भरे स्कूल में कदम-कदम पर जद्दोजहद करनी पड़ी। कहीं पानी, कहीं कीचड़, और कहीं तखतों के सहारे परीक्षा कक्ष की ओर बढ़ते छात्र—इस दृश्य ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। यह तस्वीरें हैं सिरगिट्टी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की, जो किसी स्कूल की नहीं बल्कि एक जल-भराव वाले कैंप की तरह नजर आ रहा है। स्कूल परिसर बीते पांच दिनों से पूरी तरह पानी में डूबा है। सड़क, मैदान और गलियारे सब एक जैसे—बस पानी ही पानी। ऐसे में व्यापम परीक्षा के लिए पहुंचे छात्रों को लकड़ी के फट्टों, ईंटों और तखतों का सहारा लेना पड़ा।परीक्षार्थियों ने बताया कि स्कूल तक पहुंचने में ही आधे से ज्यादा ऊर्जा खर्च हो गई। पानी से बचने की कोशिश में वे या तो फिसलते रहे या भीगते रहे।

किसी ने चप्पल उतारकर नंगे पैर परीक्षा भवन तक का रास्ता तय किया, तो किसी ने फट्टों पर संतुलन बनाकर खुद को गिरने से बचाया। छात्राओं के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल भरी थी।हालांकि शनिवार को कलेक्टर और निगम कमिश्नर ने स्कूल का निरीक्षण कर कुछ अस्थायी इंतज़ाम किए थे, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही निकली। बारिश थमी नहीं, पानी निकासी नहीं हो सकी और छात्रों को उन्हीं असुविधाओं के बीच परीक्षा देनी पड़ी। यहां तक कि स्कूल के नियमित छात्रों की छुट्टियां कर दी गई हैं, लेकिन व्यापम परीक्षा टाली नहीं गई। प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि परीक्षा निर्विघ्न संपन्न कराई गई, लेकिन तस्वीरें और छात्रों की हालत गवाही दे रही थी कि परीक्षा सिर्फ पेन-पेपर की नहीं थी, बल्कि धैर्य और हिम्मत की भी थी। सवाल सिर्फ परीक्षा दिलवाने का नहीं, सवाल यह है कि क्या इतने खराब हालात में परीक्षा करवाना ही एकमात्र विकल्प था।जब परीक्षा पानी में तैरती हो, और उम्मीदें तखतों के सहारे टिकती हों, तो ये सिर्फ सरकारी परीक्षा नहीं रह जाती यह भविष्य की अग्निपरीक्षा बन जाती है।




