मंगला वार्ड-13 में धूमधाम से मना पोला महोत्सव सजे-धजे बैलों संग परंपरा, आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम

छत्तीसगढ़ की धरती पर किसानों का त्योहार पोला महोत्सव इस बार भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बिलासपुर के मंगला वार्ड-13 में आयोजित इस पर्व ने कृषि संस्कृति और परंपराओं को जीवंत कर दिया पोला महोत्सव के मौके पर वार्ड-13 का माहौल उत्सवमय हो गया। जगह-जगह सजे पंडाल, पारंपरिक संगीत, महिलाओं-बच्चों की झांकियां और मेले का रंगारंग नजारा देखने लायक था। स्थानीय व्यंजन, खिलौने और हस्तशिल्प की दुकानों ने रौनक बढ़ाई।

किसान अपने बैलों को नहलाकर, हल्दी-घी से श्रृंगार कर पूजा अर्चना करते नजर आए। मान्यता है कि इस दिन बैलों को विश्राम देकर उनका आदर किया जाता है। कार्यक्रम में महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, अध्यक्ष दारा सिंह, पार्षद रमेश पटेल, पार्षद हेमंत मरकाम और भाजपा नेता सलामुद्दीन खान शामिल हुए।

अतिथियों ने पूजा-अर्चना कर किसानों को संबोधित किया। वार्ड पार्षद रमेश पटेल ने बताया कि मंगला वार्ड में पिछले 25 वर्षों से यह पर्व लगातार मनाया जा रहा है। इस बार 15 किसानों ने अपने सजे-धजे बैलों की झलक प्रस्तुत की। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार रामफल धुरी को, द्वितीय अंकुर यादव को, तृतीय अशोक सूर्यवंशी को और विशेष पुरस्कार श्याम यादव को मिला।

सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन सम्मान भी दिया गया। पोला महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित किया कि बैल केवल किसान के साथी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति के असली आधार हैं। मंगला वार्ड-13 का यह आयोजन परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता की मिसाल बन गया।

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