
लिंगियाडीह क्षेत्र में मकान तोड़े जाने के निर्देश के बाद बीते एक माह से क्षेत्रवासी अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए उनके आशियानों को बचाने के लिए वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन की ओर से यह कहा जा रहा है कि जमीन शासकीय है और आगे कोई योजना लाई जा सकती है, लेकिन फिलहाल सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन या नीति सामने नहीं आई है। इसी अनिश्चितता के चलते क्षेत्र के रहवासी भय और असमंजस में हैं।धरना-प्रदर्शन की अगुवाई कर रही महिलाओं ने साफ कहा कि वे अपने घर टूटने नहीं देंगी और जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार को आंदोलन का तीसरा दिन रहा, जिसमें वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ-साथ विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि भी समर्थन देने पहुंचे। नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह लोगों को बेघर करना न्यायसंगत नहीं है।समर्थन में पहुंचे वक्ताओं ने मांग की कि यदि लोग वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं, तो सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए न्यूनतम शुल्क लेकर उन्हें स्थायी पट्टा देना चाहिए। इससे न केवल लोगों का आशियाना सुरक्षित रहेगा, बल्कि विवाद का स्थायी समाधान भी निकल सकेगा।




