
न्यायधानी के नगर निगम में शासन के आदेश का ये हाल है! आदेश है! कि नियमित कर्मचारियों को हर महीने की 5 तारीख और दैयनिक, टास्क ठेका श्रमियों को 7 तारीख तक वेतन/पारिश्रमिक का भुगतान करना है! इसके बावजूद यहां ठेका कर्मचारियों को 3_3, 4_4 माह से भुगतान ही नहीं हो रहा है! इसके चलते मेहनतकस कर्मचारियों के समक्ष भूखो मरने की नौबत है! नगर निगम की कार्यशैली की वजह से कर्मचारी बेहद परेशान है लगातार में ज्ञापन सॉफ्टवेयर इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।तत्कालीन निगम आयुक्त कह चुके कि हर माह ठेकेदारों को बिल का भुगतान किया जा रहा है! मेयर भी ठेकेदारों को हड़काने की बात कह रही है! पर कर्मचारियों को भुगतान नहीं हो रहा है! सवाल यह उठ रहा है! कि जब निगम प्रशासन हर माह बिल का भुगतान कर रहा है! तो ठेका श्रमिको को भुगतान क्यों नहीं मिल रहा है! क्या ये उनके मानव अधिकारों का हनन नहीं है! 8_9 हजार रुपए मासिक पाने वाले गरीब ठेका कर्मी आखिर अपने परिवारों का पेट कैसे पाले किसी को मकान किराए की टेंशन है! तो किसी को बच्चों के स्कूल के फीस की तो किसी को चिकित्सा और दवाइयों के लिए वेतन का इंतजार है! स्वायत सासी कर्मचारी संघ इसके लिए लगातार शासन प्रशासन के समक्ष पत्राचार कर रहा है! इसी पत्र को संज्ञान में लेते हुए… शासन ने नियमित को 5 और अन्य कर्मचारियों को हर महीने के 7 तारीख को वेतन भुगतान करने का फरमान भी जारी कर दिया है! पर सब फोकला फांसी है! कंगाल निगम प्रशासन न तो बिजली का बिल अदा कर पा रहा है! न कर्मचारियों को वेतन नगर निगम सत्ता में भाजपा के काबिल होने के बाद ठेका कर्मचारियों को अफसरों ने फुटबॉल बना उनका जीवन संकट में डाल दिया है! एक जोन से दूसरे जोन भेजने के कारण जहां कई कर्मचारियों को वेतन/पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है! तो वहीं अपने चहेते को काम देने के चक्कर में कई का नाम भी काट दिया गया है! पीड़ित कर्मचारी जोन और निगम दफ्तर के चक्कर काट रहे है!




