
जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में जिला पंचायत ने एक बड़ी और सराहनीय पहल की है। अब गांवों में होने वाले शादी-ब्याह, भंडारे और सामाजिक आयोजनों का स्वरूप बदलने जा रहा है, जहां सिंगल यूज प्लास्टिक की जगह स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से बढ़ाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे पर रोक लगाने के लिए जिला पंचायत ने बर्तन बैंक योजना को मिशन मोड में लागू किया है। इस योजना के तहत प्रत्येक गांव में स्टील के बर्तनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि आयोजनों में प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को बर्तन बैंक के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये दीदियां जरूरतमंद परिवारों को स्टील के बर्तन उपलब्ध कराएंगी और साथ-साथ ग्रामीणों को प्लास्टिक से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के प्रति जागरूक भी करेंगी।अधिकारियों का कहना है कि आयोजनों के बाद फेंका गया प्लास्टिक खेतों, नालियों और जल स्रोतों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

इसी स्थायी समस्या के समाधान के लिए ग्राम स्तर पर बर्तन बैंक का विस्तार किया जा रहा है, जिससे कचरे में कमी लाई जा सके। इस पहल से न सिर्फ प्लास्टिक कचरा कम होगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बचेगी और पशुओं की जान भी सुरक्षित रहेगी। साथ ही स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आय का नया साधन मिलेगा, जिससे महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी। हालांकि योजना की सफलता अब इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी देखना होगा कि यह पहल कागजों से निकलकर ज़मीन पर कितनी कारगर साबित होती है।




